Friday, November 8, 2019

आडवाणी का 92वां जन्मदिन, 'लौहपुरुष' की गिरफ़्तारी का क़िस्सा

इस बंगले में तब बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव रहा करते थे. सुबह का वक्त था. बाहर बैठे सुरक्षाकर्मियों को इत्तला थी कि मुख्यमंत्री ने कुछ बड़े अफ़सरों को बुलाया है. तभी एक-एक करके कई सफे़द एंबेसेडर कारें वहां पहुंची.

कुछ देर बाद पटना के पुलिस मुख्यालय में तैनात डीआईजी (हेडक्वार्टर) रामेश्वर उरांव और वरिष्ठ आइएएस राजकुमार सिंह (तत्कालीन रजिस्ट्रार-कापरेटिव) भी तलब किए गए.

लालू यादव तब सिर्फ़ 42 साल के थे. सात महीने ही पहले उन्होंने बिहार की सत्ता संभाली थी. विश्वनाथ प्रताप सिंह भारत के प्रधानमंत्री थे. केंद्र में नेशनल फ्रंट की सरकार थी. उसे भारतीय जनता पार्टी का समर्थन हासिल था.

लालकृष्ण आडवाणी बीजेपी के अध्यक्ष थे और अटल बिहारी वाजपेयी लोकसभा में बीजेपी संसदीय दल के नेता. तब बीजेपी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा निकाली थी. 25 सितंबर से शुरू रथयात्रा 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचनी थी.

लालू यादव ने इसी रथयात्रा को रोकने की योजना बनाई थी. इसके लिए उन्हें लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ़्तार करना था. पटना के मुख्यमंत्री आवास में इसी के मद्देनज़र हाई-लेवल मीटिंग चल रही थी. रामेश्वर उरांव और आरके सिंह इसी वजह से वहां तलब किए गए. अंदर अधिकारियों के साथ बैठे मुख्यमंत्री लालू यादव उनका इंतज़ार कर रहे थे.

मुख्यमंत्री ने मुझसे पूछा कि क्या आप लालकृष्ण आडवाणी को गिरफ़्तार करेंगे. मैंने तत्काल हामी भरी. तब लालू जी ने चुटकी ली और कहां उरांव साहब, लोग ढेला (पत्थर का टुकड़ा) चलाएगा (मारेगा). कर पाइएगा. मैंने कहा कि जिस दिन पुलिस की वर्दी पहनी, तभी समझ गए थे कि फूल नहीं, पत्थर मिलेगा. मुझे कोई दिक्कत नहीं होगी. मैं यह करने के लिए तैयार हूं. गिरफ़्तारी को अंजाम देने के लिए मजिस्ट्रेट की भी ज़रुरत थी. मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी मुकुंद बाबू ने आरके सिंह साहब को यह ज़िम्मेदारी सौंपी.

हमें सारी योजना बताई गई और कहा गया कि बगैर किसी हिंसा के इस काम को पूरा करना है. हमें बताया गया कि आडवाणी जी को समस्तीपुर में गिरफ़्तार करने के बाद दुमका ले जाना है और वहां से मसानजोर. यह योजना गोपनीय रखी गई थी.

शाम होने के बाद हमें समस्तीपुर निकलना था. चीफ़ पायलट अविनाश बाबू को लालू जी ने खुद अपने विश्वास में लिया था. पटना एयरपोर्ट पर रात में उड़ान के लिए जरुरी लाइटिंग का इंतजाम किया गया क्योंकि वहां रात में उड़ान की व्यवस्था नहीं थी. देर शाम हमने (रामेश्वर उरांव और आरके सिंह) हेलिकाप्टर से उड़ान भरी. समस्तीपुर में सर्किट हाउस के बगल में स्थित पटेल मैदान में हेलिकाप्टर की लैंडिंग हुई. हम लोग समस्तीपुर के एसपी दफ़्तर गए.

वहां जोनल आइजी आरआर प्रसाद, कमिश्नर और वहां के डीएम भी थे. हम लोगों ने वहां बैठक की. टेलिफ़ोन एक्सजेंच को डाउन कराया गया ताकि कोई फ़ोन नहीं कर सके. यह सब आधी रात के वक्त हुआ. रात धीरे-धीरे बीत रही थी. हम लोग पूरी सतर्कता बरत रहे थे ताकि आपरेशन लीक नहीं हो. हम लोगों ने सर्किट हाउस मे संपर्क किया. पता चला कि आडवाणी जी रात ढाई बजे वहां आए थे. वे काफ़ी थके हुए थे. हमने उनके जगने का इंतज़ार किया.

23 अक्टूबर की सुबह पौने पांच बजे हम लोगों ने आडवाणी जी के कमरे का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने खुद ही दरवाजा खोला. उन्होंने पूछा कि हमलोग कौन हैं. हमने उन्हें अपना परिचय देने के बाद उनकी गिरफ़्तारी के वारंट की बात बताई. कहा कि हमारे पास आपकी गिरफ़्तारी का आदेश है.

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